बिहार स्कूल नामांकन में बदलाव – नए नियम जारी

बिहार के सरकारी स्कूलों में नामांकन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। हाल ही में आयोजित समर कैंप के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ—राज्यभर में करीब 12 लाख छात्रों की पहचान की गई है, जो पढ़ाई में कमजोर हैं। खासतौर पर कक्षा 5वीं और 6ठी के कई छात्र ऐसे हैं, जो न तो एक पूरा पैराग्राफ पढ़ पा रहे हैं और न ही उसे ठीक से बोल पा रहे हैं। इस alarming स्थिति के बाद शिक्षा विभाग ने नामांकन और शिक्षा सुधार की प्रक्रिया में अहम बदलाव करने का फैसला लिया है।

सरकारी स्कूलों में एक बच्चे पर खर्च 6 हजार… पर उन्हें जोड़-घटाव भी नहीं आता

बिहार सरकार हर महीने एक सरकारी स्कूल के छात्र पर औसतन ₹6000 खर्च कर रही है, जबकि निजी स्कूलों की फीस ₹3000 से ₹5000 के बीच होती है। इसके बावजूद सरकारी स्कूलों के परिणाम लगातार कमजोर बने हुए हैं। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की बुनियादी शिक्षा में गंभीर कमी पाई गई है।

हालिया रिपोर्ट के अनुसार, कक्षा 5वीं और 6ठी के करीब 6 लाख छात्र जोड़, घटाव, गुणा और भाग जैसी बुनियादी गणितीय क्रियाएं नहीं कर पा रहे हैं। उन्हें पहाड़े याद नहीं हैं और कई तो गिनती भी पूरी तरह नहीं जानते। अधिकांश छात्र सिर्फ 1 या 2 अंकों की सम संख्याएं जोड़ पाते हैं, लेकिन विषम संख्याओं को जोड़ने में असमर्थ हैं। यह स्थिति शिक्षा की नींव पर सवाल खड़े करती है।

समर कैंप में यह सच्चाई सामने आई।

हाल ही में आयोजित समर कैंप के दौरान बिहार के सरकारी स्कूलों में करीब 6 लाख कमजोर छात्रों की पहचान की गई। इन बच्चों की पढ़ाई में पिछड़ने की मुख्य वजह गणित और विज्ञान जैसे विषयों में उनकी कमजोर पकड़ है। कई छात्रों को हवा, पानी जैसे बुनियादी विज्ञान विषयों की भी सामान्य जानकारी नहीं है। अब शिक्षा विभाग ने तय किया है कि इन छात्रों पर स्कूलों में विशेष फोकस किया जाएगा, ताकि उनकी शैक्षणिक स्थिति में सुधार लाया जा सके।

2 से 20 जून तक लगा था कैंप

बिहार में 2 जून से 20 जून तक समर कैंप का आयोजन किया गया, जिसमें राज्य के 38 जिलों के 1 लाख से अधिक टोलों में कैंप लगाए गए। इस विशेष अभियान में लगभग 12 लाख छात्रों ने भाग लिया। ये वे छात्र थे जो गणित, विज्ञान और सामान्य विषयों में कमजोर पाए गए थे। हर कैंप में औसतन 10 से 15 छात्रों को शामिल किया गया और दो घंटे की कक्षाएं आयोजित की गईं।

इस समर कैंप में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान को प्राथमिकता दी गई। बच्चों की नींव मजबूत करने के उद्देश्य से विशेष मॉड्यूल तैयार किए गए, जिससे वे पढ़ाई में आत्मविश्वास हासिल कर सकें।

सरकारी स्कूलों में छात्रों पर खर्च

बिहार सरकार राज्य के बजट का पांचवां हिस्सा शिक्षा पर खर्च कर रही है। हर महीने एक छात्र पर औसतन ₹6000 से अधिक खर्च किया जा रहा है, जिसमें छात्रवृत्ति, पोशाक, किताबें, मिड-डे मील, शिक्षकों व अधिकारियों की सैलरी और भवन निर्माण जैसे खर्च शामिल हैं। सिर्फ पोशाक के लिए प्रति छात्र ₹600 से ₹1500 और साइकिल योजना के तहत ₹3000 तक दिए जा रहे हैं।

हाल ही में हुए समर कैंप में छात्रों की गणितीय समझ को सुधारने पर विशेष फोकस किया गया। उन्हें खेल आधारित तरीकों से पढ़ाया गया, जिससे उनकी कमजोरियों का खुलासा हुआ। गणित के साथ-साथ हिंदी और अन्य विषयों में भी छात्रों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
– सुनील कुमार, शिक्षा मंत्री, बिहार

लक्ष्य निर्धारण कर छात्रों को पढ़ाया जाए तो फायदा

बिहार की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए शिक्षकों को अपने पढ़ाने के तरीके में बदलाव लाना होगा। शिक्षण प्रक्रिया को लक्ष्य आधारित बनाना जरूरी है, ताकि छात्रों को स्पष्ट दिशा मिल सके। जो विषयवस्तु कक्षा 1 से 5वीं तक सिखाई जाती है, उसका प्रभाव 6वीं कक्षा में साफ दिखना चाहिए।

पढ़ाई को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए जरूरी है कि शिक्षक छात्रों को रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी चीजों के माध्यम से शिक्षा दें। इससे न केवल उनकी समझ बेहतर होगी, बल्कि वे विषयों से गहराई से जुड़ पाएंगे।

बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए शिक्षकों को पढ़ाने के तौर-तरीकों में बदलाव लाना होगा। गिनती और पहाड़े जैसी मूलभूत बातें बच्चों को चॉकलेट, पेंसिल जैसे रोजमर्रा के उदाहरणों से सिखाई जानी चाहिए। शब्दों का स्पष्ट उच्चारण कराया जाए और हर विषय की प्रतिदिन पुनरावृत्ति सुनिश्चित की जाए, खासकर पिछले दिन पढ़ाए गए टॉपिक्स की।

शिक्षक और छात्र दोनों को समय पर स्कूल पहुंचना चाहिए और हर दिन क्लास में पढ़ाई होनी चाहिए। कक्षाओं को क्विज़, भाषण और छोटे सांस्कृतिक कार्यक्रमों से रोचक बनाया जाए, जिनमें सभी छात्र भाग लें। पर्यावरण जैसे जरूरी विषयों पर भी समय-समय पर जानकारी दी जाए।

गणित और विज्ञान की पढ़ाई को आसान बनाने के लिए इसे वस्तुओं से तुलना कर समझाया जाए। स्कूल में शिक्षकों को राजनीति, घरेलू विषय, वेतन या ट्रांसफर-पोस्टिंग से संबंधित चर्चाओं से बचना चाहिए।

छात्रों को उनकी क्षमताओं के आधार पर तीन समूहों—कमजोर, मध्यम और तेज—में बाँटा जाए। प्रत्येक समूह में इन तीनों तरह के छात्रों को शामिल कर पढ़ाई का सामूहिक लाभ सुनिश्चित किया जा सकता है।

पहली कक्षा के नामांकन में आधार आवश्यक नहीं

अब बिहार के विद्यालयों में कक्षा एक में नामांकन के लिए आधार कार्ड अनिवार्य नहीं रहेगा। सरकार ने इस नियम में बदलाव करते हुए सिर्फ कक्षा 2 और उससे ऊपर की कक्षाओं में नामांकन के लिए आधार कार्ड की अनिवार्यता को बरकरार रखा है। इस संबंध में प्राथमिक शिक्षा निदेशक साहिला ने शुक्रवार को सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को आधिकारिक पत्र जारी किया है, ताकि नए निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

पत्र में कहा गया है कि

हाल ही में हुई विभागीय बैठक में यह जानकारी सामने आई कि आधार कार्ड की अनिवार्यता के चलते कई बच्चे कक्षा 1 में नामांकन से वंचित रह जा रहे हैं। इस स्थिति को देखते हुए प्राथमिक शिक्षा निदेशक ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) को निर्देश जारी किया है कि वे ऐसे सभी बच्चों का नामांकन स्कूलों में कराएं, जिन्होंने 6 वर्ष की आयु पूरी कर ली है। साथ ही, इन छात्रों को ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर पंजीकृत करना भी अनिवार्य किया गया है, ताकि उनका शैक्षणिक रिकॉर्ड डिजिटली सुरक्षित रहे।

प्राथमिक शिक्षा निदेशक ने सभी डीईओ को भेजा पत्र

साथ ही, निर्देश दिया गया है कि जिन बच्चों के पास आधार कार्ड नहीं है, उनके लिए समय-समय पर विशेष आधार पंजीकरण शिविर आयोजित किए जाएं। शिक्षा विभाग द्वारा सरकारी स्कूलों में कक्षा एक के नामांकन को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक अभियान चलाया गया था। इस अभियान का उद्देश्य अधिक से अधिक योग्य बच्चों को स्कूल से जोड़ना और उन्हें प्रारंभिक शिक्षा से वंचित न रहने देना है।

दो व ऊपर की कक्षाओं में दाखिले को आधार की अनिवार्यता रहेगी

नामांकन अभियान के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे बच्चों का भी स्कूलों में नामांकन कर लिया गया था, जिनका आधार कार्ड उस समय उपलब्ध नहीं था। अभिभावकों से यह उम्मीद की गई थी कि वे जल्द ही बच्चों का आधार बनवा लेंगे, लेकिन अधिकांश मामलों में ऐसा संभव नहीं हो पाया।

इस कारण उन बच्चों की प्रविष्टि ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर नहीं हो सकी। अब जब कक्षा 1 के नामांकन में आधार की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है, तो ऐसे सभी बच्चों का डेटा पोर्टल पर अपलोड किया जा सकेगा। इससे शिक्षा विभाग के डिजिटल रिकॉर्ड को सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी।

आधार कार्ड बनवाने के लिए शिविर लगाने का दिया निर्देश

शैक्षणिक सत्र 2024–25 में अब तक बिहार के सरकारी स्कूलों में कक्षा एक में लगभग 9 लाख 50 हजार बच्चों का नामांकन हो चुका है। जबकि हर वर्ष औसतन 10 से 12 लाख बच्चों का नामांकन कक्षा एक में होता है। पिछले शैक्षणिक वर्ष 2024–25 में कुल 11 लाख 21 हजार 438 बच्चों ने कक्षा एक में नामांकन कराया था।

इस आंकड़े को देखते हुए शिक्षा विभाग इस बार भी करीब 11 लाख से अधिक नामांकन का लक्ष्य लेकर चल रहा है, ताकि सभी योग्य बच्चों को स्कूली शिक्षा से जोड़ा जा सके।

दो स्कूलों में नामांकन रोकने को आधार हुआ था अनिवार्य

वर्ष 2023 में शिक्षा विभाग के तत्कालीन अपर मुख्य सचिव के.के. पाठक ने एक ही छात्र का नामांकन दो या अधिक स्कूलों में होने से रोकने के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य कर दिया था। इस निर्णय के बाद कक्षा 1 से 12 तक करीब 22 लाख छात्रों का नामांकन रद्द कर दिया गया था।

कई मामलों में यह देखा गया था कि छात्र सरकारी स्कूलों में योजनाओं का लाभ लेने के लिए नामांकित थे, जबकि वास्तव में वे निजी स्कूलों में पढ़ाई कर रहे थे। इस गड़बड़ी को रोकने के लिए हर पंचायत में आधार नामांकन के लिए एक स्कूल चिन्हित किया गया था।

वर्तमान में भी प्रखंड स्तर पर आधार बनवाने की व्यवस्था मौजूद है, लेकिन अभिभावकों की लापरवाही के कारण अब भी बड़ी संख्या में बच्चों के आधार कार्ड नहीं बन पाए हैं, जिससे उनकी ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर प्रविष्टि बाधित हो रही है।

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Frequently Asked Questions

बिना आधार कार्ड वाले बच्चों का नामांकन कैसे किया जाएगा?

जिन बच्चों के पास आधार नहीं है, उनका नामांकन स्कूल में किया जाएगा और उनका डेटा ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर अपलोड किया जा सकेगा।

आधार नहीं होने पर क्या भविष्य में कोई दिक्कत होगी?

नहीं, नामांकन में बाधा नहीं होगी। हालांकि आधार बनवाने की प्रक्रिया जल्द पूरी कराने की सलाह दी गई है।

क्या शिक्षा विभाग आधार कार्ड बनवाने के लिए कोई सुविधा देगा?

हां, हर पंचायत या प्रखंड स्तर पर आधार नामांकन शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि बच्चों का आधार समय पर बन सके।

क्या कक्षा 1 के नामांकन के लिए न्यूनतम उम्र तय है?

जी हां, कक्षा 1 में नामांकन के लिए बच्चे की आयु कम से कम 6 वर्ष होनी चाहिए।

ई-शिक्षाकोष पोर्टल क्या है और इसका क्या उद्देश्य है?

ई-शिक्षाकोष पोर्टल एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिस पर छात्रों का शैक्षणिक डेटा सुरक्षित और केंद्रीकृत रूप में रखा जाता है।

क्या एक ही बच्चे का नामांकन अब भी दो स्कूलों में हो सकता है?

नहीं, शिक्षा विभाग ने दोहराए गए नामांकन को रोकने के लिए आधार आधारित सत्यापन प्रणाली लागू की थी, जो अब भी उच्च कक्षाओं में लागू है।

पिछली बार कितने बच्चों का नामांकन रद्द हुआ था?

2023 में करीब 22 लाख छात्रों का नामांकन रद्द किया गया था, क्योंकि उनका नामांकन दो या अधिक स्कूलों में पाया गया था।

Conclusion

बिहार सरकार द्वारा स्कूल नामांकन प्रक्रिया में किए गए नए बदलाव न केवल शिक्षा को अधिक समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं, बल्कि यह डिजिटल शिक्षा व्यवस्था को भी सशक्त बनाते हैं। कक्षा 1 में आधार की अनिवार्यता हटाना उन लाखों बच्चों के लिए राहत है जो दस्तावेजी बाधाओं के कारण शिक्षा से वंचित रह जाते थे। साथ ही ई-शिक्षाकोष पोर्टल के माध्यम से छात्रों का डाटा सुरक्षित रखना, शिक्षा की पारदर्शिता और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में सहायक होगा।

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