
सरकारी स्कूलों में कक्षा 1 से 12वीं तक के छात्रों की ऑनर हाजिरी अब डिजिटल तरीके से दर्ज की जाएगी। इस पहल के तहत प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ा रहे शिक्षकों को टैबलेट उपलब्ध कराए जाएंगे। छात्रों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने के लिए चुनी गई एजेंसी द्वारा इन स्कूलों में टैबलेट की आपूर्ति की जाएगी।
बच्चों का ऑनर हाजरी बनाने के लिए स्कूल में आया टैबलेट
बच्चों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए स्कूलों को मिलेगा टैबलेट
हर स्कूल में प्रधानाध्यापक के साथ एक शिक्षक को डिजिटल हाजिरी सिस्टम के संचालन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस संबंध में बिहार शिक्षा परियोजना परिषद ने सभी डीईओ और डीपीओ (SSA) को आधिकारिक पत्र भेजा है।
जिला स्तर पर टैबलेट आपूर्ति के बाद, उन्हें विद्यालय स्तर पर रिकॉर्ड के साथ संरक्षित किया जाएगा। कौन-से स्कूल को कौन-सा टैबलेट आवंटित किया गया है, इसका विवरण टैबलेट के IMEI नंबर सहित स्कूल के नाम के आगे दर्ज किया जाएगा, ताकि ट्रैकिंग और निगरानी में पारदर्शिता बनी रहे।
प्राथमिक व मध्य विद्यालयों में दो-दो व माध्यमिक व उच्च माध्यमिक में दो से तीन टैब देंगे
एजेंसी को निर्देश दिया गया है कि प्रखंडवार विद्यालयों की संख्या के अनुसार टैबलेट का वितरण बीआरसी कार्यालय से किया जाए। प्रत्येक प्रखंड स्तर पर टैबलेट वितरण का पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा, और वहीं से स्कूलों को टैबलेट सौंपे जाएंगे।
इसके लिए निर्धारित तिथि पर प्रधानाध्यापकों को बीआरसी कार्यालय में आमंत्रित किया जाएगा, जहां एजेंसी के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहेंगे। वे विद्यालय प्रमुख और शिक्षक को टैबलेट की कार्यप्रणाली समझाएंगे और उसे फंक्शनल बनाकर उपयोग के लिए तैयार करेंगे।
टैबलेट सौंपने के बाद, बीईओ (खंड शिक्षा पदाधिकारी) द्वारा ‘यूजर एक्सेप्टेंस रिपोर्ट’ एजेंसी प्रतिनिधि को प्रदान की जाएगी, ताकि वितरण प्रक्रिया आधिकारिक रूप से पूर्ण मानी जाए।
स्काउट एंड गाइड के कैडेट्स छपरा के लिए रवाना
मुजफ्फरपुर, बिहार: 18 से 22 जून तक सेंट्रल पब्लिक स्कूल, छपरा में आयोजित होने वाले पांच दिवसीय योगा उत्सव में भाग लेने के लिए मुजफ्फरपुर जिले की स्काउट-गाइड टीम रवाना हो गई है। इस राज्य स्तरीय आयोजन में बिहार के सभी जिलों से 550 स्काउट-गाइड भाग लेंगे।
जिला शिक्षा पदाधिकारी के निर्देश पर, डीओसी नवनीश कुमार के नेतृत्व में मुखर्जी सेमिनरी प्लस टू विद्यालय के आठ स्काउट कैडेट इस आयोजन के लिए रवाना हुए। टीम को विद्यालय के प्राचार्य त्रिपुरारी सिंह ने हरी झंडी दिखाकर विदा किया।
नवनीश कुमार ने जानकारी दी कि इस उत्सव के दौरान कैडेट्स रंगोली, पेंटिंग, यूथ फोरम, लीडरशिप सेमिनार, वाद-विवाद प्रतियोगिता, रूट मार्च और साइड सीन जैसी विविध गतिविधियों में भाग लेंगे।
बीस लाख बच्चों का आधार बनाने की समस्या होगी दूर, तैनात होंगे ऑपरेटर
राज्य के करीब 20 लाख स्कूली बच्चे, जिनके पास अभी तक आधार कार्ड नहीं है, उनकी पहचान संबंधी समस्या जल्द ही समाप्त होने वाली है।
शिक्षा विभाग ने पहल करते हुए स्कूलों में स्थायी आधार केंद्र खोलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन केंद्रों पर प्रशिक्षित ऑपरेटरों की नियुक्ति की जाएगी ताकि बिना आधार वाले छात्रों का नामांकन और अन्य शैक्षणिक प्रक्रियाएं सुचारू रूप से हो सकें।
60 फीसदी से अधिक में आउटसोर्सिंग पर बहाल थे ऑपरेटर
शिक्षा विभाग ने राज्य भर के स्कूलों में आधार नामांकन प्रक्रिया को दोबारा सुचारू करने के लिए ऑपरेटरों की बहाली हेतु नई निविदा जारी की है।
राज्य के 534 प्रखंडों के दो-दो उच्च विद्यालयों में आधार केंद्र खोले गए थे, जहां बच्चों का आधार कार्ड बनाया जाता था। इन केंद्रों में से 60% पर ऑपरेटरों की बहाली आउटसोर्सिंग के माध्यम से हुई थी। लेकिन विभाग ने कुछ समय पहले आउटसोर्स ऑपरेटरों से काम लेना बंद कर दिया, जिससे केंद्रों पर कार्य रुक गया और बच्चों को आधार बनवाने में परेशानी होने लगी।
अब शिक्षा विभाग ने फिर से नई प्रक्रिया के तहत ऑपरेटर बहाली के लिए टेंडर जारी किया है। जानकारी के अनुसार, जुलाई महीने से इन केंद्रों पर बच्चों का आधार नामांकन कार्य दोबारा शुरू हो जाएगा।
आधार बनेगा तभी बनेगा अपार
सभी स्कूली बच्चों के अपार कार्ड भी बनाए जाएंगे, जब केंद्रों पर आधार निर्माण की प्रक्रिया सुचारू रूप से शुरू हो जाएगी।
दोहरा नामांकन रोकने के लिए आधार कार्ड जरूरी
बिहार में अब भी लगभग 20 लाख बच्चों के पास आधार कार्ड नहीं है। नामांकन की दोहराव की पहचान के लिए यह आवश्यक है कि सभी नामांकित बच्चों की आधार जानकारी सिस्टम में उपलब्ध हो। वर्ष 2024-25 में शिक्षा विभाग की जांच में 3 लाख 3 हजार बच्चे दोहरे नामांकन के मामलों में सामने आए। आधार कार्ड की वजह से ही इन बच्चों की पहचान संभव हो पाई। ये बच्चे निजी और सरकारी दोनों स्कूलों में नामांकित थे और सरकारी योजनाओं का लाभ दोहरी तरह से ले रहे थे।
बच्चों का ऑनर हाजरी बनाने के लिए स्कूल में आया टैबलेट
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Frequently Asked Questions
क्या अब सभी कक्षाओं में टैबलेट से हाजिरी लगेगी?
हाँ, नई व्यवस्था के तहत कक्षा 1 से 12 तक के सभी छात्रों की उपस्थिति टैबलेट से दर्ज की जाएगी।
क्या यह व्यवस्था पूरे राज्य के सभी स्कूलों में लागू होगी?
शुरुआत में इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, लेकिन लक्ष्य है कि यह सभी सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में लागू हो।
टैबलेट से हाजिरी कैसे लगेगी?
शिक्षक टैबलेट में एक विशेष ऐप के माध्यम से छात्रों की उपस्थिति दर्ज करेंगे, जिसमें आधार आधारित पहचान, फोटो या रीयल टाइम डेटा शामिल हो सकता है।
क्या हर शिक्षक को टैबलेट मिलेगा?
हाँ, सरकार द्वारा शिक्षकों को टैबलेट उपलब्ध कराए जा रहे हैं ताकि वे उपस्थिति प्रणाली को सुचारू रूप से चला सकें।
क्या छात्रों का आधार कार्ड होना जरूरी है?
जी हाँ, उपस्थिति को आधार से लिंक किया जाएगा ताकि दोहरे नामांकन और फर्जी उपस्थिति को रोका जा सके।
क्या यह प्रणाली ऑनलाइन काम करेगी?
हाँ, यह प्रणाली क्लाउड-बेस्ड होगी और इंटरनेट से जुड़ी होगी, लेकिन ऑफलाइन मोड की सुविधा भी हो सकती है।
क्या इससे मिड डे मील या छात्रवृत्ति योजनाओं पर असर पड़ेगा?
बिलकुल, यह व्यवस्था योजनाओं की पारदर्शिता और लाभार्थी सत्यापन में मदद करेगी।
Conclusion
टैबलेट के माध्यम से कक्षा 1 से 12 तक के छात्रों की हाजिरी दर्ज करने की पहल स्कूलों को डिजिटल दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल उपस्थिति प्रणाली पारदर्शी और सटीक होगी, बल्कि दोहरा नामांकन, फर्जी हाजिरी, और सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग पर भी लगाम लगेगी। आधार लिंक उपस्थिति प्रणाली से छात्रों की वास्तविक उपस्थिति और लाभार्थियों की पहचान आसान होगी। यह तकनीकी बदलाव शिक्षा व्यवस्था को अधिक स्मार्ट, जवाबदेह और भविष्य उन्मुख बनाएगा, जिससे छात्रों, शिक्षकों और सरकार—सभी को लाभ मिलेगा।